श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.6.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

मेढ्रं तस्य विनिर्भिन्‍नं स्वधिष्ण्यं क उपाविशत्।

रेतसांशेन येनासावानन्दं प्रतिपद्यते॥ १९

meḍhraṃ tasya vinirbhinnaṃ svadhiṣṇyaṃ ka upāviśat|

retasāṃśena yenāsāvānandaṃ pratipadyate|| 19

अर्थ

अब उसके लिंग उत्पन्‍न हुआ। अपने इस आश्रयमें प्रजापतिने अपने अंश वीर्यके सहित प्रवेश किया, जिससे जीव आनन्दका अनुभव करता है॥ १९॥✎ 220

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #220 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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