फिर परमात्माकी दृष्टि पड़नेपर वायुयुक्त तेजने काल, माया और चिदंशके योगसे विकृत होकर रसतन्मात्रके कार्य जलको उत्पन्न किया॥ ३४॥✎ 212213214
अनिलेनान्वितं ज्योतिर्विकुर्वत्परवीक्षितम्।
आधत्ताम्भो रसमयं कालमायांशयोगतः॥ ३४
फिर परमात्माकी दृष्टि पड़नेपर वायुयुक्त तेजने काल, माया और चिदंशके योगसे विकृत होकर रसतन्मात्रके कार्य जलको उत्पन्न किया॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 256) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/5/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)