श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब विदुरजीने जीवोंके कल्याणके लिये इस प्रकार प्रश्न किया, तब तो मुनिश्रेष्ठ भगवान् मैत्रेयजीने उनकी बहुत बड़ाई करते हुए यों कहा॥ १७॥
स एवं भगवान् पृष्टः क्षत्त्रा कौषारविर्मुनिः।
पुंसां निःश्रेयसार्थेन तमाह बहु मानयन्॥ १७
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब विदुरजीने जीवोंके कल्याणके लिये इस प्रकार प्रश्न किया, तब तो मुनिश्रेष्ठ भगवान् मैत्रेयजीने उनकी बहुत बड़ाई करते हुए यों कहा॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 255) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/5/17/