उद्धवजीने कहा—उस तत्त्वज्ञानके लिये आपको मुनिवर मैत्रेयजीकी सेवा करनी चाहिये। इस मर्त्यलोकको छोड़ते समय मेरे सामने स्वयं भगवान्ने ही आपको उपदेश करनेके लिये उन्हें आज्ञा दी थी॥ २६॥✎ 207
ननु ते तत्त्वसंराध्य ऋषिः कौषारवोऽन्ति मे।
साक्षाद्भगवताऽऽदिष्टो मर्त्यलोकं जिहासता॥ २६
उद्धवजीने कहा—उस तत्त्वज्ञानके लिये आपको मुनिवर मैत्रेयजीकी सेवा करनी चाहिये। इस मर्त्यलोकको छोड़ते समय मेरे सामने स्वयं भगवान्ने ही आपको उपदेश करनेके लिये उन्हें आज्ञा दी थी॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.4.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 251) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/4/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)