निवृत्तजीवापत्तित्वात्क्षीणक्लेशाऽऽप्तनिर्वृतिः ॥ २६
brahmaṇyavasthitamatirbhagavatyātmasaṃśraye |
nivṛttajīvāpattitvātkṣīṇakleśā''ptanirvṛtiḥ || 26
अर्थ
इस प्रकार जीवके अधिष्ठानभूत परब्रह्म श्रीभगवान्में ही बुद्धिकी स्थिति हो जानेसे उनका जीवभाव निवृत्त हो गया और वे समस्त क्लेशोंसे मुक्त होकर परमानन्दमें निमग्न हो गयीं॥ २६॥✎ 3501315
ब्रह्मण्यवस्थितमतिर्भगवत्यात्मसंश्रये ।
निवृत्तजीवापत्तित्वात्क्षीणक्लेशाऽऽप्तनिर्वृतिः ॥ २६
इस प्रकार जीवके अधिष्ठानभूत परब्रह्म श्रीभगवान्में ही बुद्धिकी स्थिति हो जानेसे उनका जीवभाव निवृत्त हो गया और वे समस्त क्लेशोंसे मुक्त होकर परमानन्दमें निमग्न हो गयीं॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.33.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 403) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/33/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#350 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् में → श्रीभगवान्में
#1315 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): परमा-नन्दमें → परमानन्दमें