श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.32.31

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 32 · अथ द्वात्रिंशोऽध्यायः

इत्येतत्कथितं गुर्वि ज्ञानं तद्ब्रह्मदर्शनम्।

येनानुबुद्ध्यते तत्त्वं प्रकृतेः पुरुषस्य च॥ ३१

ityetatkathitaṃ gurvi jñānaṃ tadbrahmadarśanam|

yenānubuddhyate tattvaṃ prakṛteḥ puruṣasya ca|| 31

अर्थ

पूजनीय माताजी! मैंने तुम्हें यह ब्रह्मसाक्षात्कारका साधनरूप ज्ञान सुनाया, इसके द्वारा प्रकृति और पुरुषके यथार्थस्वरूपका बोध हो जाता है॥ ३१॥

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