श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.32.23

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 32 · अथ द्वात्रिंशोऽध्यायः

वासुदेवे भगवति भक्तियोगः प्रयोजितः।

जनयत्याशु वैराग्यं ज्ञानं यद्ब्रह्मदर्शनम्॥ २३

vāsudeve bhagavati bhaktiyogaḥ prayojitaḥ|

janayatyāśu vairāgyaṃ jñānaṃ yadbrahmadarśanam|| 23

अर्थ

भगवान् वासुदेवके प्रति किया हुआ भक्तियोग तुरंत ही संसारसे वैराग्य और ब्रह्मसाक्षात्काररूप ज्ञानकी प्राप्ति करा देता है॥ २३॥

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