श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.32.21

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 32 · अथ द्वात्रिंशोऽध्यायः

ततस्ते क्षीणसुकृताः पुनर्लोकमिमं सति।

पतन्ति विवशा देवैः सद्यो विभ्रंशितोदयाः॥ २१

tataste kṣīṇasukṛtāḥ punarlokamimaṃ sati|

patanti vivaśā devaiḥ sadyo vibhraṃśitodayāḥ|| 21

अर्थ

माताजी! पितृलोकके भोग भोग लेनेपर जब उनके पुण्य क्षीण हो जाते हैं, तब देवतालोग उन्हें वहाँके ऐश्‍वर्यसे च्युत कर देते हैं और फिर उन्हें विवश होकर तुरन्त ही इस लोकमें गिरना पड़ता है॥ २१॥

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