श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.30.20

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

यातनादेह आवृत्य पाशैर्बद‍्ध्वा गले बलात्।

नयतो दीर्घमध्वानं दण्ड्यं राजभटा यथा॥ २०

yātanādeha āvṛtya pāśairbaddhvā gale balāt|

nayato dīrghamadhvānaṃ daṇḍyaṃ rājabhaṭā yathā|| 20

अर्थ

वे यमदूत उसे यातनादेहमें डाल देते हैं और फिर जिस प्रकार सिपाही किसी अपराधीको ले जाते हैं, उसी प्रकार उसके गलेमें रस्सी बाँधकर बलात् यमलोककी लंबी यात्रामें उसे ले जाते हैं॥ २०॥

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