श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.29.7

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

भक्तियोगो बहुविधो मार्गैर्भामिनि भाव्यते।

स्वभावगुणमार्गेण पुंसां भावो विभिद्यते॥ ७

bhaktiyogo bahuvidho mārgairbhāmini bhāvyate|

svabhāvaguṇamārgeṇa puṃsāṃ bhāvo vibhidyate|| 7

अर्थ

श्रीभगवान्‌ने कहा—माताजी! साधकोंके भावके अनुसार भक्तियोगका अनेक प्रकारसे प्रकाश होता है, क्योंकि स्वभाव और गुणोंके भेदसे मनुष्योंके भावमें भी विभिन्‍नता आ जाती है॥ ७॥✎ 334

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #334 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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