॥ श्रीहरिः ॥
यद्भयाद्वाति वातोऽयं सूर्यस्तपति यद्भयात्।
यद्भयाद्वर्षते देवो भगणो भाति यद्भयात्॥ ४०
yadbhayādvāti vāto'yaṃ sūryastapati yadbhayāt|
yadbhayādvarṣate devo bhagaṇo bhāti yadbhayāt|| 40
अर्थ
इसीके भयसे वायु चलता है, इसीके भयसे सूर्य तपता है, इसीके भयसे इन्द्र वर्षा करते हैं और इसीके भयसे तारे चमकते हैं॥ ४०॥
यद्भयाद्वाति वातोऽयं सूर्यस्तपति यद्भयात्।
यद्भयाद्वर्षते देवो भगणो भाति यद्भयात्॥ ४०
इसीके भयसे वायु चलता है, इसीके भयसे सूर्य तपता है, इसीके भयसे इन्द्र वर्षा करते हैं और इसीके भयसे तारे चमकते हैं॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.29.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 384) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/29/40/