उनकी अति सुन्दर किशोर अवस्था है, वे भक्तोंपर कृपा करनेके लिये आतुर हो रहे हैं। बड़ी मनोहर झाँकी है। भगवान् सदा सम्पूर्ण लोकोंसे वन्दित हैं॥ १७॥✎ 327
अपीच्यदर्शनं शश्वत्सर्वलोकनमस्कृतम्।
सन्तं वयसि कैशोरे भृत्यानुग्रहकातरम्॥ १७
उनकी अति सुन्दर किशोर अवस्था है, वे भक्तोंपर कृपा करनेके लिये आतुर हो रहे हैं। बड़ी मनोहर झाँकी है। भगवान् सदा सम्पूर्ण लोकोंसे वन्दित हैं॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.28.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 375) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/28/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)