श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.68

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

क्षुत्तृड्भ्यामुदरं सिन्धुर्नोदतिष्ठत्तदा विराट्।

हृदयं मनसा चन्द्रो नोदतिष्ठत्तदा विराट्॥ ६८

kṣuttṛḍbhyāmudaraṃ sindhurnodatiṣṭhattadā virāṭ|

hṛdayaṃ manasā candro nodatiṣṭhattadā virāṭ|| 68

अर्थ

समुद्रने क्षुधा-पिपासाके सहित उदरमें प्रवेश किया, फिर भी विराट् पुरुष न उठा। चन्द्रमाने मनके सहित हृदयमें प्रवेश किया, तो भी विराट् पुरुष न उठा॥ ६८॥

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