विष्णुने गतिके सहित चरणोंमें प्रवेश किया, तो भी विराट् पुरुष न उठा। नदियोंने रुधिरके सहित नाडियोंमें प्रवेश किया, तब भी विराट् पुरुष न उठा॥ ६७॥
विष्णुर्गत्यैव चरणौ नोदतिष्ठत्तदा विराट्।
नाडीर्नद्यो लोहितेन नोदतिष्ठत्तदा विराट्॥ ६७
विष्णुने गतिके सहित चरणोंमें प्रवेश किया, तो भी विराट् पुरुष न उठा। नदियोंने रुधिरके सहित नाडियोंमें प्रवेश किया, तब भी विराट् पुरुष न उठा॥ ६७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.26.67 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 369) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/26/67/