श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.65

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

त्वचं रोमभिरोषध्यो नोदतिष्ठत्तदा विराट्।

रेतसा शिश्नमापस्तु नोदतिष्ठत्तदा विराट्॥ ६५

tvacaṃ romabhiroṣadhyo nodatiṣṭhattadā virāṭ|

retasā śiśnamāpastu nodatiṣṭhattadā virāṭ|| 65

अर्थ

ओषधियोंने रोमोंके सहित त्वचामें प्रवेश किया फिर भी विराट् पुरुष न उठा। जलने वीर्यके साथ लिंगमें प्रवेश किया, तब भी विराट् पुरुष न उठा॥ ६५॥

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