॥ श्रीहरिः ॥
अवादयंस्तदा व्योम्नि वादित्राणि घनाघनाः।
गायन्ति तं स्म गन्धर्वा नृत्यन्त्यप्सरसो मुदा॥ ७
avādayaṃstadā vyomni vāditrāṇi ghanāghanāḥ|
gāyanti taṃ sma gandharvā nṛtyantyapsaraso mudā|| 7
अर्थ
उस समय आकाशमें मेघ जल बरसाते हुए गरज-गरजकर बाजे बजाने लगे, गन्धर्वगण गान करने लगे और अप्सराएँ आनन्दित होकर नाचने लगीं॥ ७॥
अवादयंस्तदा व्योम्नि वादित्राणि घनाघनाः।
गायन्ति तं स्म गन्धर्वा नृत्यन्त्यप्सरसो मुदा॥ ७
उस समय आकाशमें मेघ जल बरसाते हुए गरज-गरजकर बाजे बजाने लगे, गन्धर्वगण गान करने लगे और अप्सराएँ आनन्दित होकर नाचने लगीं॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 353) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/7/