श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.6

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तस्यां बहुतिथे काले भगवान्मधुसूदनः।

कार्दमं वीर्यमापन्‍नो जज्ञेऽग्‍निरिव दारुणि॥ ६

tasyāṃ bahutithe kāle bhagavānmadhusūdanaḥ|

kārdamaṃ vīryamāpanno jajñe'gniriva dāruṇi|| 6

अर्थ

इस प्रकार बहुत समय बीत जानेपर भगवान् मधुसूदन कर्दमजीके वीर्यका आश्रय ले उसके गर्भसे इस प्रकार प्रकट हुए, जैसे काष्ठमेंसे अग्‍नि॥ ६॥

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