इस लोकमें मेरा यह जन्म लिंगशरीरसे मुक्त होनेकी इच्छावाले मुनियोंके लिये आत्मदर्शनमें उपयोगी प्रकृति आदि तत्त्वोंका विवेचन करनेके लिये ही हुआ है॥ ३६॥✎ 310
एतन्मे जन्म लोकेऽस्मिन्मुमुक्षूणां दुराशयात्।
प्रसंख्यानाय तत्त्वानां सम्मतायात्मदर्शने॥ ३६
इस लोकमें मेरा यह जन्म लिंगशरीरसे मुक्त होनेकी इच्छावाले मुनियोंके लिये आत्मदर्शनमें उपयोगी प्रकृति आदि तत्त्वोंका विवेचन करनेके लिये ही हुआ है॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 355) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#310 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने