श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.27

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अहो पापच्यमानानां निरये स्वैरमंगलैः।

कालेन भूयसा नूनं प्रसीदन्तीह देवताः॥ २७

aho pāpacyamānānāṃ niraye svairamaṃgalaiḥ|

kālena bhūyasā nūnaṃ prasīdantīha devatāḥ|| 27

अर्थ

‘अहो! अपने पापकर्मोंके कारण इस दुःखमय संसारमें नाना प्रकारसे पीडित होते हुए पुरुषोंपर देवगण तो बहुत काल बीतनेपर प्रसन्‍न होते हैं॥ २७॥

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