‘अहो! अपने पापकर्मोंके कारण इस दुःखमय संसारमें नाना प्रकारसे पीडित होते हुए पुरुषोंपर देवगण तो बहुत काल बीतनेपर प्रसन्न होते हैं॥ २७॥
अहो पापच्यमानानां निरये स्वैरमंगलैः।
कालेन भूयसा नूनं प्रसीदन्तीह देवताः॥ २७
‘अहो! अपने पापकर्मोंके कारण इस दुःखमय संसारमें नाना प्रकारसे पीडित होते हुए पुरुषोंपर देवगण तो बहुत काल बीतनेपर प्रसन्न होते हैं॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 354) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/27/