श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.25

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

ततस्त ऋषयः क्षत्तः कृतदारा निमन्त्र्य तम्।

प्रातिष्ठन्‍नन्दिमापन्‍नाः स्वं स्वमाश्रममण्डलम्॥ २५

tatasta ṛṣayaḥ kṣattaḥ kṛtadārā nimantrya tam|

prātiṣṭhannandimāpannāḥ svaṃ svamāśramamaṇḍalam|| 25

अर्थ

विदुरजी! इस प्रकार विवाह हो जानेपर वे सब ऋषि कर्दमजीकी आज्ञा ले अति आनन्दपूर्वक अपने-अपने आश्रमोंको चले गये॥ २५॥

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