श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.22

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

मरीचये कलां प्रादादनसूयामथात्रये।

श्रद्धामङ्गिरसेऽयच्छत्पुलस्त्याय हविर्भुवम्॥ २२

marīcaye kalāṃ prādādanasūyāmathātraye|

śraddhāmaṅgirase'yacchatpulastyāya havirbhuvam|| 22

अर्थ

उन्होंने अपनी कला नामकी कन्या मरीचिको, अनसूया अत्रिको, श्रद्धा अंगिराको और हविर्भू पुलस्त्यको समर्पित की॥ २२॥

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