श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.23.48

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

अतः सा सुषुवे सद्यो देवहूतिः स्त्रियः प्रजाः।

सर्वास्ताश्चारुसर्वाङ्‌ग्‍यो लोहितोत्पलगन्धयः॥ ४८

ataḥ sā suṣuve sadyo devahūtiḥ striyaḥ prajāḥ|

sarvāstāścārusarvāṅgyo lohitotpalagandhayaḥ|| 48

अर्थ

इससे देवहूतिके एक ही साथ नौ कन्याएँ पैदा हुईं। वे सभी सर्वांगसुन्दरी थीं और उनके शरीरसे लाल कमलकी-सी सुगन्ध निकलती थी॥ ४८॥

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