श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.23.42

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

किं दुरापादनं तेषां पुंसामुद्दामचेतसाम्।

यैराश्रितस्तीर्थपदश्‍चरणो व्यसनात्ययः॥ ४२

kiṃ durāpādanaṃ teṣāṃ puṃsāmuddāmacetasām|

yairāśritastīrthapadaścaraṇo vyasanātyayaḥ|| 42

अर्थ

विदुरजी! जिन्होंने भगवान्‌के भवभयहारी पवित्र पादपद्मोंका आश्रय लिया है, उन धीर पुरुषोंके लिये कौन-सी वस्तु या शक्ति दुर्लभ है॥ ४२॥

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