॥ श्रीहरिः ॥
भ्राजिष्णुना विमानेन कामगेन महीयसा।
वैमानिकानत्यशेत चरँल्लोकान् यथानिलः॥ ४१
bhrājiṣṇunā vimānena kāmagena mahīyasā|
vaimānikānatyaśeta caram̐llokān yathānilaḥ|| 41
अर्थ
उस कान्तिमान् और इच्छानुसार चलनेवाले श्रेष्ठ विमानपर बैठकर वायुके समान सभी लोकोंमें विचरते हुए कर्दमजी विमानविहारी देवताओंसे भी आगे बढ़ गये॥ ४१॥
भ्राजिष्णुना विमानेन कामगेन महीयसा।
वैमानिकानत्यशेत चरँल्लोकान् यथानिलः॥ ४१
उस कान्तिमान् और इच्छानुसार चलनेवाले श्रेष्ठ विमानपर बैठकर वायुके समान सभी लोकोंमें विचरते हुए कर्दमजी विमानविहारी देवताओंसे भी आगे बढ़ गये॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 350) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/23/41/