॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.23.21
विहारस्थानविश्रामसंवेशप्रांगणाजिरैः ।
यथोपजोषं रचितैर्विस्मापनमिवात्मनः॥ २१
vihārasthānaviśrāmasaṃveśaprāṃgaṇājiraiḥ |
yathopajoṣaṃ racitairvismāpanamivātmanaḥ|| 21
अर्थ
उसमें सुविधानुसार क्रीडास्थली, शयनगृह, बैठक, आँगन और चौक आदि बनाये गये थे—जिनके कारण वह विमान स्वयं कर्दमजीको भी विस्मित-सा कर रहा था॥ २१॥