श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.43

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

कारण्डवैः प्लवैर्हंसैः कुररैर्जलकुक्कुटैः।

सारसैश्‍चक्रवाकैश्‍च चकोरैर्वल्गु कूजितम्॥ ४३

kāraṇḍavaiḥ plavairhaṃsaiḥ kurarairjalakukkuṭaiḥ|

sārasaiścakravākaiśca cakorairvalgu kūjitam|| 43

अर्थ

वहाँ जलकाग, बत्तख आदि जलपर तैरनेवाले पक्षी हंस, कुरर, जलमुर्ग, सारस, चकवा और चकोर मधुर स्वरसे कलरव कर रहे थे॥ ४३॥

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