श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.42

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

कदम्बचम्पकाशोककरंजबकुलासनैः ।

कुन्दमन्दारकुटजैश्चूतपोतैरलङ्कृतम् ॥ ४२

kadambacampakāśokakaraṃjabakulāsanaiḥ |

kundamandārakuṭajaiścūtapotairalaṅkṛtam || 42

अर्थ

वह आश्रम कदम्ब, चम्पक, अशोक, करंज, बकुल, असन, कुन्द, मन्दार, कुटज और नये-नये आमके वृक्षोंसे अलंकृत था॥ ४२॥

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