श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.9

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

विदुर उवाच

प्रजापतिपतिः सृष्ट्वा प्रजासर्गे प्रजापतीन्।

किमारभत मे ब्रह्मन् प्रब्रूह्यव्यक्तमार्गवित्॥ ९

prajāpatipatiḥ sṛṣṭvā prajāsarge prajāpatīn|

kimārabhata me brahman prabrūhyavyaktamārgavit|| 9

अर्थ

विदुरजीने कहा—ब्रह्मन्! आप परोक्ष विषयोंको भी जाननेवाले हैं; अतः यह बतलाइये कि प्रजापतियोंके पति श्रीब्रह्माजीने मरीचि आदि प्रजापतियोंको उत्पन्‍न करके फिर सृष्टिको बढ़ानेके लिये क्या किया॥ ९॥

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