उन्होंने ब्रह्माजीके त्याग देनेपर उनका वह प्रतिबिम्ब-शरीर ग्रहण किया। इसीलिये ये सब उषःकालमें अपनी पत्नियोंके साथ मिलकर ब्रह्माजीके गुण-कर्मादिका गान किया करते हैं॥ ४६॥
ते तु तज्जगृहू रूपं त्यक्तं यत्परमेष्ठिना।
मिथुनीभूय गायन्तस्तमेवोषसि कर्मभिः॥ ४६
उन्होंने ब्रह्माजीके त्याग देनेपर उनका वह प्रतिबिम्ब-शरीर ग्रहण किया। इसीलिये ये सब उषःकालमें अपनी पत्नियोंके साथ मिलकर ब्रह्माजीके गुण-कर्मादिका गान किया करते हैं॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 333) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/46/