श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.46

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

ते तु तज्जगृहू रूपं त्यक्तं यत्परमेष्ठिना।

मिथुनीभूय गायन्तस्तमेवोषसि कर्मभिः॥ ४६

te tu tajjagṛhū rūpaṃ tyaktaṃ yatparameṣṭhinā|

mithunībhūya gāyantastamevoṣasi karmabhiḥ|| 46

अर्थ

उन्होंने ब्रह्माजीके त्याग देनेपर उनका वह प्रतिबिम्ब-शरीर ग्रहण किया। इसीलिये ये सब उषःकालमें अपनी पत्नियोंके साथ मिलकर ब्रह्माजीके गुण-कर्मादिका गान किया करते हैं॥ ४६॥

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