स किन्नरान् किम्पुरुषान् प्रत्यात्म्येनासृजत्प्रभुः।
मानयन्नात्मनाऽऽत्मानमात्माभासं विलोकयन्॥ ४५
sa kinnarān kimpuruṣān pratyātmyenāsṛjatprabhuḥ|
mānayannātmanā''tmānamātmābhāsaṃ vilokayan|| 45
अर्थ
एक बार ब्रह्माजीने अपना प्रतिबिम्ब देखा। तब अपनेको बहुत सुन्दर मानकर उस प्रतिबिम्बसे किन्नर और किम्पुरुष उत्पन्न किये॥ ४५॥
स किन्नरान् किम्पुरुषान् प्रत्यात्म्येनासृजत्प्रभुः।
मानयन्नात्मनाऽऽत्मानमात्माभासं विलोकयन्॥ ४५
एक बार ब्रह्माजीने अपना प्रतिबिम्ब देखा। तब अपनेको बहुत सुन्दर मानकर उस प्रतिबिम्बसे किन्नर और किम्पुरुष उत्पन्न किये॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 333) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/45/