श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.37

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

इति सायन्तनीं सन्ध्यामसुराः प्रमदायतीम्।

प्रलोभयन्तीं जगृहुर्मत्वा मूढधियः स्त्रियम्॥ ३७

iti sāyantanīṃ sandhyāmasurāḥ pramadāyatīm|

pralobhayantīṃ jagṛhurmatvā mūḍhadhiyaḥ striyam|| 37

अर्थ

इस प्रकार स्त्रीरूपसे प्रकट हुई उस सायंकालीन सन्ध्याने उन्हें अत्यन्त कामासक्त कर दिया और उन मूढ़ोंने उसे कोई रमणीरत्न समझकर ग्रहण कर लिया॥ ३७॥

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