॥ श्रीहरिः ॥
गूहन्तीं व्रीडयाऽऽत्मानं नीलालकवरूथिनीम्।
उपलभ्यासुरा धर्म सर्वे सम्मुमुहुः स्त्रियम्॥ ३१
gūhantīṃ vrīḍayā''tmānaṃ nīlālakavarūthinīm|
upalabhyāsurā dharma sarve sammumuhuḥ striyam|| 31
अर्थ
वह नीली-नीली अलकावलीसे सुशोभित सुकुमारी मानो लज्जाके मारे अपने अंचलमें ही सिमिटी जाती थी। विदुरजी! उस सुन्दरीको देखकर सब-के-सब असुर मोहित हो गये ॥ ३१॥
गूहन्तीं व्रीडयाऽऽत्मानं नीलालकवरूथिनीम्।
उपलभ्यासुरा धर्म सर्वे सम्मुमुहुः स्त्रियम्॥ ३१
वह नीली-नीली अलकावलीसे सुशोभित सुकुमारी मानो लज्जाके मारे अपने अंचलमें ही सिमिटी जाती थी। विदुरजी! उस सुन्दरीको देखकर सब-के-सब असुर मोहित हो गये ॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 332) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/20/31/