प्रभु तो प्रत्यक्षवत् सबके हृदयकी जाननेवाले हैं। उन्होंने ब्रह्माजीकी आतुरता देखकर कहा—‘तुम अपने इस कामकलुषित शरीरको त्याग दो।’ भगवान्के यों कहते ही उन्होंने वह शरीर भी छोड़ दिया॥ २८॥
सोऽवधार्यास्य कार्पण्यं विविक्ताध्यात्मदर्शनः।
विमुञ्चात्मतनुं घोरामित्युक्तो विमुमोच ह॥ २८
प्रभु तो प्रत्यक्षवत् सबके हृदयकी जाननेवाले हैं। उन्होंने ब्रह्माजीकी आतुरता देखकर कहा—‘तुम अपने इस कामकलुषित शरीरको त्याग दो।’ भगवान्के यों कहते ही उन्होंने वह शरीर भी छोड़ दिया॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 332) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/28/