श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.14

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

तानि चैकैकशः स्रष्टुमसमर्थानि भौतिकम्।

संहत्य दैवयोगेन हैममण्डमवासृजन्॥ १४

tāni caikaikaśaḥ sraṣṭumasamarthāni bhautikam|

saṃhatya daivayogena haimamaṇḍamavāsṛjan|| 14

अर्थ

वे सब अलग-अलग रहकर भूतोंके कार्यरूप ब्रह्माण्डकी रचना नहीं कर सकते थे; इसलिये उन्होंने भगवान्‌की शक्तिसे परस्पर संगठित होकर एक सुवर्णवर्ण अण्डकी रचना की॥ १४॥✎ 293 294 295

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #293 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने
  • #294 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #295 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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