श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.2.32

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अयाजयद्गोसवेन गोपराजं द्विजोत्तमैः।

वित्तस्य चोरुभारस्य चिकीर्षन् सद‍्व्ययं विभुः॥ ३२

ayājayadgosavena goparājaṃ dvijottamaiḥ|

vittasya corubhārasya cikīrṣan sadvyayaṃ vibhuḥ|| 32

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने बढ़े हुए धनका सद‍्व्यय करानेकी इच्छासे श्रेष्ठ ब्राह्मणोंके द्वारा नन्दबाबासे गोवर्धनपूजारूप गोयज्ञ करवाया॥ ३२॥✎ 197 198 199

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #197 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #198 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #199 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें