ब्रह्माजीकी प्रार्थनासे पृथ्वीका भार उतारकर उसे सुखी करनेके लिये कंसके कारागारमें वसुदेव-देवकीके यहाँ भगवान्ने अवतार लिया था॥ २५॥✎ 197198199
वसुदेवस्य देवक्यां जातो भोजेन्द्रबन्धने।
चिकीर्षुर्भगवानस्याः शमजेनाभियाचितः॥ २५
ब्रह्माजीकी प्रार्थनासे पृथ्वीका भार उतारकर उसे सुखी करनेके लिये कंसके कारागारमें वसुदेव-देवकीके यहाँ भगवान्ने अवतार लिया था॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.2.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 244) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/2/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)