श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.2.18

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

को वा अमुष्याङ्‌घ्रिसरोजरेणुं

विस्मर्तुमीशीत पुमान् विजिघ्रन्।

यो विस्फुरद्भ्रूविटपेन भूमे-

र्भारं कृतान्तेन तिरश्‍चकार॥ १८

ko vā amuṣyāṅghrisarojareṇuṃ

vismartumīśīta pumān vijighran|

yo visphuradbhrūviṭapena bhūme-

rbhāraṃ kṛtāntena tiraścakāra|| 18

अर्थ

जिन्होंने कालरूप अपने भ्रुकुटिविलाससे ही पृथ्वीका सारा भार उतार दिया था, उन श्रीकृष्णके पादपद्मपरागका सेवन करनेवाला ऐसा कौन पुरुष है, जो उसे भूल सके॥ १८॥✎ 194 1297 1298

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #194 शब्दोंके बीचका स्थान: जाना—भगवान् की → जाना—भगवान्‌की
  • #1297 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रकुटिविलाससे → भु्रुकुटिविलाससे
  • #1298 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रुकुटिविलाससे → भ्रुकुटिविलाससे

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