vaikuṇṭhaṃ tadadhiṣṭhānaṃ vikuṇṭhaṃ ca svayamprabham|| 27
अर्थ
श्रीब्रह्माजी कहते हैं—तदनन्तर उन मुनीश्वरोंने नयनाभिराम भगवान् विष्णु और उनके स्वयंप्रकाश वैकुण्ठधामके दर्शन करके प्रभुकी परिक्रमा की और उन्हें प्रणामकर तथा उनकी आज्ञा पा भगवान्के ऐश्वर्यका वर्णन करते हुए प्रमुदित हो वहाँसे लौट गये॥ २७-२८॥✎ 270271
यह अर्थ श्लोक 27–28 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
अथ ते मुनयो दृष्ट्वा नयनानन्दभाजनम्।
वैकुण्ठं तदधिष्ठानं विकुण्ठं च स्वयम्प्रभम्॥ २७
श्रीब्रह्माजी कहते हैं—तदनन्तर उन मुनीश्वरोंने नयनाभिराम भगवान् विष्णु और उनके स्वयंप्रकाश वैकुण्ठधामके दर्शन करके प्रभुकी परिक्रमा की और उन्हें प्रणामकर तथा उनकी आज्ञा पा भगवान्के ऐश्वर्यका वर्णन करते हुए प्रमुदित हो वहाँसे लौट गये॥ २७-२८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.16.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 316) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/16/27/