श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.5

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ययोत्तानपदः पुत्रो मुनिना गीतयार्भकः।

मृत्योः कृत्वैव मूर्ध्न्यङ्‌घ्रिमारुरोह हरेः पदम्॥ ५

yayottānapadaḥ putro muninā gītayārbhakaḥ|

mṛtyoḥ kṛtvaiva mūrdhnyaṅghrimāruroha hareḥ padam|| 5

अर्थ

देखो, उत्तानपादका पुत्र ध्रुव बालकपनमें श्रीनारदजीकी सुनायी हुई हरिकथाके प्रभावसे ही मृत्युके सिरपर पैर रखकर भगवान्‌के परमपदपर आरूढ़ हो गया था॥ ५॥✎ 1967

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1967 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): उसीके → उसीको

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें