श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.39

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

प्राणिनां हन्यमानानां दीनानामकृतागसाम्।

स्त्रीणां निगृह्यमाणानां कोपितेषु महात्मसु॥ ३९

prāṇināṃ hanyamānānāṃ dīnānāmakṛtāgasām|

strīṇāṃ nigṛhyamāṇānāṃ kopiteṣu mahātmasu|| 39

अर्थ

जब उनके हाथसे बहुत-से निरपराध और दीन प्राणी मारे जाने लगेंगे, स्त्रियोंपर अत्याचार होने लगेंगे और महात्माओंको क्षुब्ध किया जाने लगेगा, उस समय सम्पूर्ण लोकोंकी रक्षा करनेवाले श्रीजगदीश्‍वर कुपित होकर अवतार लेंगे और इन्द्र जैसे पर्वतोंका दमन करता है, उसी प्रकार उनका वध करेंगे॥ ३९-४०॥

यह अर्थ श्लोक 39–40 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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