श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.38

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

भविष्यतस्तवाभद्रावभद्रे जाठराधमौ।

लोकान् सपालांस्त्रींश्‍चण्डि मुहुराक्रन्दयिष्यतः॥ ३८

bhaviṣyatastavābhadrāvabhadre jāṭharādhamau|

lokān sapālāṃstrīṃścaṇḍi muhurākrandayiṣyataḥ|| 38

अर्थ

अमंगलमयी चण्डी! तुम्हारी कोखसे दो बड़े ही अमंगलमय और अधम पुत्र उत्पन्‍न होंगे। वे बार-बार सम्पूर्ण लोक और लोकपालोंको अपने अत्याचारोंसे रुलायेंगे॥ ३८॥

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