श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! उन ब्रह्मवादी मुनियोंके इस प्रकार स्तुति करनेपर सबकी रक्षा करनेवाले वराहभगवान्ने अपने खुरोंसे जलको स्तम्भित-कर उसपर पृथ्वीको स्थापित कर दिया॥ ४६॥✎ 256
इत्युपस्थीयमानस्तैर्मुनिभिर्ब्रह्मवादिभिः।
सलिले स्वखुराक्रान्त उपाधत्तावितावनिम्॥ ४६
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! उन ब्रह्मवादी मुनियोंके इस प्रकार स्तुति करनेपर सबकी रक्षा करनेवाले वराहभगवान्ने अपने खुरोंसे जलको स्तम्भित-कर उसपर पृथ्वीको स्थापित कर दिया॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.13.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 298) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/13/46/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#256 शब्दोंके बीचका स्थान: वराहभगवान् ने → वराहभगवान्ने