श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.7

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

धिया निगृह्यमाणोऽपि भ्रुवोर्मध्यात्प्रजापतेः।

सद्योऽजायत तन्मन्युः१ कुमारो नीललोहितः॥ ७

dhiyā nigṛhyamāṇo'pi bhruvormadhyātprajāpateḥ|

sadyo'jāyata tanmanyuḥ kumāro nīlalohitaḥ|| 7

अर्थ

किंतु बुद्धिद्वारा उनके बहुत रोकनेपर भी वह क्रोध तत्काल प्रजापतिकी भौंहोंके बीचमेंसे एक नीललोहित (नीले और लाल रंगके) बालकके रूपमें प्रकट हो गया॥ ७॥✎ 1590

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—तन्मन्योः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 287)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1590 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: बुद्धि-द्वारा → बुद्धिद्वारा

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