श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.5

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तान् बभाषे स्वभूः पुत्रान् प्रजाः सृजत पुत्रकाः।

तन्‍नैच्छन्मोक्षधर्माणो वासुदेवपरायणाः॥ ५

tān babhāṣe svabhūḥ putrān prajāḥ sṛjata putrakāḥ|

tannaicchanmokṣadharmāṇo vāsudevaparāyaṇāḥ|| 5

अर्थ

अपने इन पुत्रोंसे ब्रह्माजीने कहा, ‘पुत्रो! तुमलोग सृष्टि उत्पन्‍न करो।’ किंतु वे जन्मसे ही मोक्षमार्ग-(निवृत्तिमार्ग-) का अनुसरण करनेवाले और भगवान्‌के ध्यानमें तत्पर थे, इसलिये उन्होंने ऐसा करना नहीं चाहा॥ ५॥✎ 1590

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1590 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: बुद्धि-द्वारा → बुद्धिद्वारा

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