॥ श्रीहरिः ॥
यदरोदीः सुरश्रेष्ठ सोद्वेग इव बालकः।
ततस्त्वामभिधास्यन्ति नाम्ना रुद्र इति प्रजाः॥ १०
yadarodīḥ suraśreṣṭha sodvega iva bālakaḥ|
tatastvāmabhidhāsyanti nāmnā rudra iti prajāḥ|| 10
अर्थ
देवश्रेष्ठ! तुम जन्म लेते ही बालकके समान फूट-फूटकर रोने लगे, इसलिये प्रजा तुम्हें ‘रुद्र’ नामसे पुकारेगी॥ १०॥
यदरोदीः सुरश्रेष्ठ सोद्वेग इव बालकः।
ततस्त्वामभिधास्यन्ति नाम्ना रुद्र इति प्रजाः॥ १०
देवश्रेष्ठ! तुम जन्म लेते ही बालकके समान फूट-फूटकर रोने लगे, इसलिये प्रजा तुम्हें ‘रुद्र’ नामसे पुकारेगी॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 287) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/12/10/