॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.10.21
गौरजो महिषः कृष्णः सूकरो गवयो रुरुः।
द्विशफाः पशवश्चेमे अविरुष्ट्रश्च सत्तम॥ २१
gaurajo mahiṣaḥ kṛṣṇaḥ sūkaro gavayo ruruḥ|
dviśaphāḥ paśavaśceme aviruṣṭraśca sattama|| 21
अर्थ
साधुश्रेष्ठ! इन तिर्यकोंमें गौ, बकरा, भैंसा, कृष्ण-मृग, सूअर, नीलगाय, रुरु नामका मृग, भेड़ और ऊँट—ये द्विशफ (दो खुरोंवाले) पशु कहलाते हैं॥ २१॥✎ 1589