श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.10.21

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

गौरजो महिषः कृष्णः सूकरो गवयो रुरुः।

द्विशफाः पशवश्चेमे अविरुष्ट्रश्‍च सत्तम॥ २१

gaurajo mahiṣaḥ kṛṣṇaḥ sūkaro gavayo ruruḥ|

dviśaphāḥ paśavaśceme aviruṣṭraśca sattama|| 21

अर्थ

साधुश्रेष्ठ! इन तिर्यकोंमें गौ, बकरा, भैंसा, कृष्ण-मृग, सूअर, नीलगाय, रुरु नामका मृग, भेड़ और ऊँट—ये द्विशफ (दो खुरोंवाले) पशु कहलाते हैं॥ २१॥✎ 1589

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1589 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: (मुँह)-से → (मुँह)से

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