सूतजी कहते हैं—सर्वज्ञ शुकदेवजीने राजा परीक्षित्के इस प्रकार पूछनेपर अति प्रसन्न होकर कहा—सुनो॥ ५॥
स एवमृषिवर्योऽयं पृष्टो राज्ञा परीक्षिता।
प्रत्याह तं सुबहुवित्प्रीतात्मा श्रूयतामिति॥ ५
सूतजी कहते हैं—सर्वज्ञ शुकदेवजीने राजा परीक्षित्के इस प्रकार पूछनेपर अति प्रसन्न होकर कहा—सुनो॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.1.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 235) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/1/5/