श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.1.4

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

न ह्यल्पार्थोदयस्तस्य विदुरस्यामलात्मनः।

तस्मिन् वरीयसि प्रश्नः साधुवादोपबृंहितः॥ ४

na hyalpārthodayastasya vidurasyāmalātmanaḥ|

tasmin varīyasi praśnaḥ sādhuvādopabṛṃhitaḥ|| 4

अर्थ

पवित्रात्मा विदुरने महात्मा मैत्रेयजीसे कोई साधारण प्रश्न नहीं किया होगा; क्योंकि उसे तो मैत्रेयजी-जैसे साधुशिरोमणिने अभिनन्दनपूर्वक उत्तर देकर महिमान्वित किया था॥ ४॥

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