श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.1.20

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

इत्थं व्रजन् भारतमेव वर्षं

कालेन यावद्गतवान् प्रभासम्।

तावच्छशास क्षितिमेकचक्रा-

मेकातपत्रामजितेन पार्थः॥ २०

itthaṃ vrajan bhāratameva varṣaṃ

kālena yāvadgatavān prabhāsam|

tāvacchaśāsa kṣitimekacakrā-

mekātapatrāmajitena pārthaḥ|| 20

अर्थ

इस प्रकार भारतवर्षमें ही विचरते-विचरते जबतक वे प्रभासक्षेत्रमें पहुँचे, तबतक भगवान् श्रीकृष्णकी सहायतासे महाराज युधिष्ठिर पृथ्वीका एकच्छत्र अखण्ड राज्य करने लगे थे॥ २०॥

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