श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.9.45

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

यदुताहं त्वया पृष्टो वैराजात् पुरुषादिदम्।

यथाऽऽसीत्तदुपाख्यास्ये प्रश्नानन्यांश्‍च कृत्स्नशः॥ ४५

yadutāhaṃ tvayā pṛṣṭo vairājāt puruṣādidam|

yathā''sīttadupākhyāsye praśnānanyāṃśca kṛtsnaśaḥ|| 45

अर्थ

तुमने मुझसे जो यह प्रश्न किया है कि विराट्पुरुषसे इस जगत‍्की उत्पत्ति कैसे हुई तथा दूसरे भी जो बहुत-से प्रश्न किये हैं, उन सबका उत्तर मैं उसी भागवतपुराणके रूपमें देता हूँ॥ ४५॥✎ 176 177 178 179

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां द्वितीयस्कन्धे नवमोऽध्यायः॥ ९॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #176 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #177 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #178 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #179 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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